The Lives of the Poet , Samuel Johnson के द्वारा लिखा गया है। इन्होंने अपनी 75 साल की आयु इंग्लैंड में बिताई जहाँ पर इन्होंने बहुत सारी कविताये लिखी, कहानियाँ लिखी और निबंध लिखी। इनमे से आज हमलोग एक कहानी पढ़ेंगे जिसका की नाम है The Lives of Poet
जॉनसन ने इस कहानी में 17th सताब्दी और 18th सताब्दी के कवियों को दिखाया है। जॉनसन ने जॉन ड्राईदेन , एलेग्जेंडर पोप , जॉन मिल्टन , जोनाथन स्विफ्ट के बहुत सारे लगभग 50 कहानी पढ़े उसके बाद उन्होंने एक लाइफस्टाइल बनाई और आज हम उसे पढ़ेंगे । जॉनसन कहते है इन्होंने अपनी पूरी जिंदगी कहानी लिखने में बिता दी और इन्होंने कई सारी इतिहासिक कविता लिखी है । जॉनसन यह भी कहते है कि वह जितने भी लेखक को चुने है उन्होंने अपनी बेस्ट देने की कोशिश की है और उनके कविता बहुत ही सामाजिक थे । जॉनसन ने सबसे पहले एलेग्जेंडर पोप के बहुत सारी कहानियों को देखा , कविता को देखा जो कि पब्लिक के लिए बहुत ही पढ़ने के लायक थे और उन्हें काफी पसंद आये और उनके कहानियों में समाज के प्रति जागरूकता थे ।
उन्हें जॉनसन ने काफी करीब से देखा । जॉनसन कहते है कि ड्राइडन की कविता , कहानियां जो थे वो तुलनात्मक थे यानी वो तुलना करते थे एक दूसरे से । उसके विपरीत एलेग्जेंडर पोप जो थे वो सटीक और सीधी बात करते थे । ड्राइडन जो थे वो अपनी दिमाग के विचारों को ज्यादा फॉलो करते थे । वहीं पोप अपने दिमाग पर शासन करते थे और अपने दिमाग को अपने काबू में रखा करते थे । दोनों में काफ़ी अंतर है आगे हम और भी अंतर देखते है । ड्राइडन कभी-कभी उदास हो जाते थे और कभी-कभी खरूस के जैसे किसी के बारे में बता देते थे और वही पोप हमेसा शरीफ़ और सिंपल रहे , हमेसा सांत दिमाग के रहे । ड्राइडन हमेसा नकारात्मक कहानी के बारे में बात करते थे और वही पोप हमेसा सकारात्मक कहानी को ज्यादा पसंद करते थे । ये थी एलेग्जेंडर पोप और जॉन ड्राइडन के बीच में अंतर ।
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अब हम आगे पढ़ेंगे और भी लेखक के बारे में । ज्यादातर Lives of the poet में स्ट्रक्चरल पैटर्न सेम रहता है । उसी को फॉलो करते हुए जॉनसन लेखक के परिवार और उनके एजुकेशन के बारे में ज्यादा बात करते थे । जॉनसन ने इसमें बहुत ही अच्छे से बताया है उनके जिंदगी के तौर - तरीके के बारे में । जॉनसन ने उनके कविता को काफ़ी ध्यान से देखा और काफ़ी कुछ समझने का प्रयास किया । जॉनसन जानना चाहते है कि ये लेखक कैसे लिखते है और पोयम्स और ड्रामाटिक में क्या अंतर होता है । जॉनसन उनके फैक्ट्स और डेट्स में बहुत ज्यादा उत्सुक थे। वो जानना चाहते थे कि ऐसी कविता लिखने का क्या तरीका है । जॉनसन का कैरियर एक विद्यार्थी की तरह शुरू हुआ था जो हर कुछ जानना चाहता था । जॉनसन ने सबसे पहले अपने दोस्त रिचर्ड की ही जिंदगी के बारे में पढ़ा ।
जॉनसन कहते है कि वो लेखक बहुत ही बिखारी कि तरह लिखते है जो कि अपने ऑडियंस को उदास करते है और उन्हें डिप्रेशन में ले जाते है और उनकी पढ़ने की भूख को खत्म कर देते है और जो लेखक अपनी बातों को अच्छे से प्यार से दिखाता है वो जॉनसन को बहुत पसंद आते है । सही मायनों में जॉनसन कहते है लेखक का काम यही है कि वो अपने ऑडियंस का मनोबल बढ़ाये ना कि उन्हें डिप्रेशन में ले जाये । जॉनसन ने इंसान की आदतों को बहुत ही बाखूबी से दिखाया है इस कहानी में । उन्होंने जब एलेग्जेंडर पोप के बारे में बात की तब उन्होंने बहुत ही बाखूबी और ईमानदारी से उनके बारे में बताया । जॉनसन ने पोप की जिंदगी से यह दिखाने की कोशिश की लेखक को कभी अपने ऑडियंस को उदास नही करना चाहिए । उन्हें हमेसा खुश रखना चाहिए और अच्छी - अच्छी बातों को बताना चाहिए ।


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