दोस्तों आप सभी का स्वागत है मेरे एस ब्लॉग पोस्ट में । मैंने एस पोस्ट में आपको The Old Man at the Bridge की Summary हिन्दी में बताई है । इस पोस्ट को पूरा पढने के बाद आपको Old Man at the Bridge Summary अच्छें से समझ में आ जाएगी ।
The Old Man at the Bridge
इस कहानी को 1938 में लिखा गया था और इसी साल इसे प्रकाशित भी करवाया गया था । इस कहानी को एक सैनिक के दृष्टि से दिखाया गया है और इस कहानी की सेटिंग रखी गयी है Spain में । इस कहानी को बताने से पहले इस कहानी की इतिहास को जानना ज्यादा जरूरी है । स्पेनिश सिविल युद्ध शुरू हुआ था साल 1936 से और इस वक़्त जर्मनी में हिटलर का आतंक था । स्पेनिश सिविल युद्ध ने पूरे यूरोप को प्रभावित किया था । ये युद्ध 1936 से 1939 तक चला था । इस कहानी की शुरुआत होती है एक बूढ़े आदमी से जो कि एक पुल के किनारे बैठ गया । वो बहुत थका हुआ और कमज़ोर था और उसके पुरे शरीर मे धुल लगी हुई थी । सारे लोग अपने परिवार और सामान के साथ पुल पार कर रहे थे लेकिन वो बेचारा बहुत थका हुआ था । वहाँ कुछ गाँव वाले थे जो स्पेनिश सिविल युद्ध लड़ना नहीं चाहते थे इसलिए वो वहाँ से भाग रहे थे । पुल के ऊपर से गाड़ियां गुजर रही थी और कुछ लोग पैदल जा रहे थे ।
लेखक इस कहानी में सोल्जर है यानी कि एक सैनिक, जो अपने साथियों के साथ मिलकर गाड़ियों को धक्का दे रहा है । गाड़िया पुल पार करते वक़्त लड़खड़ा रही थी तो वह धक्का दे रहा था । तो लेखक पुल की दूसरी ओर से आ रहा था ये देखने की दुश्मन कितना दूर है । पुल लगभग सारे लोगो ने पार कर लिया था लेकिन वह बूढ़ा आदमी वही बैठा हुआ था । लेखक उस बूढ़े आदमी के पास गया और उससे बात करने लगा । उस बूढ़े आदमी ने गर्व से बताया कि वह अपना शहर Sancarlos से आया है । ये बात बोलते हुए वह बूढ़ा आदमी बहुत खुश था । शायद, ये बात उसे खुशी दे रही होगी । उसने बताया कि वह अन्तिम वयक्ति था जिसने अपने शहर को छोड़ा क्योंकि वहाँ ये अपने जानवरों की देखभाल करता था जिसमे कबूतर, बिल्लियॉ और बकरी थी लेकिन अचानक इसे वो जगह छोर कर भागना पड़ा । लेखक इसकी बात भी सुन रहा था और साथ-साथ पुल को भी देख रहा था कि दुश्मन कहा तक पहुँचा । लेखक ने उससे पूछा कि क्या तुम्हारा कोई परिवार है । तो उसने जवाब दिया कि मेरे पास मेरे जानवरो के अलावा और कोई भी नही है । वो बोले "मेरी बिल्ली तो अपना ख्याल रख लेगी लेकिन मेरे बाकी जानवरो का क्या होगा । लेखक ने उससे नेतागीरी के विचार के बारे में पुछा तो इस पर वो बूढ़ा आदमी ने कहा कि मैं 76 साल का एक बूढ़ा आदमी हुँ , 12km चल कर आया हूँ , मैं आगे नहीं जा सकता हूँ । ऐसा उस बूढ़े आदमी ने जवाब दिया ।
Old Man at the Bridge Summary
लेखक ने फिर कहा , " लेकिन चाचा , ये सही जगह नही है बैठने के लिए । वो ट्रक आ रहा है , मैं आपको उसमे चढ़ा देता हूँ आपको वो ट्रक बार्सिलोना छोड़ देगा । तो उस बूढ़े आदमी ने कहा मैं वहा जा कर क्या करूँगा । मैं तो बार्सिलोना में किसी को जानता भी नही हूँ । लेकिन फिर भी उस बूढ़े आदमी ने सैनिक को थैंक यू बोला । वो बूढा आदमी बस अपने जानवरो के बारे में सोच रहा था , की बिल्ली तो अपना ख्याल रख लेगी लेकिन बाकी जानवरो का क्या होगा । फिर लेखक ने उससे पूछा कि आपने कबूतर के पिंजरे को खुला छोड़ा था , तो वो बोला, हा । लेखक ने कहा फिर तो तुम चिंता मत करो वो उड़ जाएंगे । उस बूढ़े आदमी ने कहा लेकिन बाकी जानवरो का क्या होगा । लेखक ने कहा अभी उनको भूल जाओ , तुम उठो और चलने की कोशिस करो । बूढ़े आदमी ने कोशिस किया लेकिन बेचारा वो चल नही पाया और वो फिर से बैठ गया और बोला मैं बस अपने जानवरो का ख्याल रखता था अब मेरे पास करने को कुछ नही है । अब हमारे लेखक ने ध्यान दिया कि ये पूर्वी रविवार का दिन था और दुश्मन एबरु नदी की तरफ बढ़ रहे थे । बादल घने थे , वो लोग अपने हवाईजहाज को उड़ा नही सकते थे । वो बूढा व्यक्ति और लेखक अंत मे बोलते है ये कहानी खत्म करते हुए की बिल्ली अपना ख्याल ख़ुद रख सकती है । बूढ़े आदमी को सिर्फ़ इस बात से खुशी मिलता था कि बिल्ली अपना ख्याल खुद रख सकती है । सिर्फ यही एक गुडलक था उसके पास में और इसी के साथ ये कहानी खत्म होती है ।

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